ओले गिरे थे सारी रात



बारिश हुई थी बहुत तेज,
ओले गिरे थे सारी रात,
खिड़की से टकराती बूँदे चुप थी,
रही होगी कुछ बात।

तेज़ हवाए टकराई थी शीशो से,
दरीचे पर बैठे, मेरी झपकियाँ टूटी थी,
ठंडा था कमरा मेरा,
शायद कोई खिड़की खुली छुटी थी।
सारा आँगन टूटे पत्तो से भर गया था,
ये बूँदे याद लेकर आयी थी अपने साथ।
बारिश हुई थी बहुत तेज, ओले गिरे थे सारी रात।



सारी सड़के भीगी थी, भीगा था सारा आकाश।
में भी बैठा था चुप, खिड़की के पास,
गिरे थे तारे निचे जब बादल गरजे थे तेज।
ठिठुर रहे थे मेरे कमरे में, कुर्सी टेबल मेज।
याद है ऐसा ही कुछ हुआ था, थी हमारी पहली मुलाकात,
बारिश हुई थी बहुत तेज, ओले गिरे थे सरी रात।

Written by Rahul Uniyal

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