जब दिल हो हद से जयाद खुश तो

जब दिल हो हद से जयाद खुश तो
आखों से छलक जाते हैं ऐ आँसू !!
जब चोट लगे इस दिल को तो
आखों से बह निकलते हैं ऐ आँसू !!
हम लाख दबा ले इनको निगाहों में
खूद-ब-खूद बह निकलते हैं ऐ आँसू !!
कोई मिलें या खो जाये जब अपना
दरद और खुशी का पहचान देते हैै ऐ आँसू !!
हम लाख छिपा ले किसी से हाल अपना मगर
दिल का हाल सुना देते हैं ऐ अाँसू !!
दिल तड़पता हैं “संजय” का कभी जब रोता है
कहते हैं दरद जिसे वही दरद तो हैं ऐ आँसू !!

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