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Na Jaane In Dino Kya Ho Jata Hai Mujhe

Sms posted in category Dukh-o-Dard,Dukhi Poetry by Rizwan

Na Jaane In Dino Kya Ho Jata Hai Mujhe.

Yeh Dil Humesha Kisi Dard Ki Talaash Main Rehtaa Hy.

Jb Keh Pata Hy Mujhe Isse Koi Dard Nhi .

Sirf Uss Dard Ky Siwa Jiss Ki Yeh Talash Main Rehta Hy…!!!

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2 Responses to 'Na Jaane In Dino Kya Ho Jata Hai Mujhe'

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  1. Dr. Bishwa Mohan Acharya "Pyasa: said,

    on September 25th, 2016 at 6:49 pm

    कर लेंगे हम यूं बसर

    तन्हा हूं इक मैं भी इधर तन्हा है इक तू भी उधर
    तन्हाई में मिलकर दोनों तै कर लें इक नई सफ़र।

    शबे-तार में क़ैद हैं हम, शबे-महताब में होगी तुम
    न रोएंगे फिर कभी मिल भी जाएं शबे-वस्ल अग़र।

    चला था मैं तुझसे मिलने, चली थी तू मुझसे मिलने
    पता नहीं दोनो को यहां, दे दे क़ासिद कोई असर।

    हम हैं यूं ही अहले ज़मीं, तू तो होगी अहले अदम
    मिल कर बना लें हम भी, दरमियां इक नई कमर।

    महकें मेरे मकां शबो-रोज़, तेरे वजूद के चन्दन से
    बाग़ों में हों महक गुलों की, कर लेंगे हम यूं बसर।

    “प्यासा”

    शबे-तार=अंधेरी रात, शबे-महताब=चांदनी रात, शबे-वस्ल=मिलन की रात, क़ासिद=पत्रवाहक, असर=निशाना, अहले-ज़मीं=सांसारिक लोग, अहले अदम=यमलोक के निवासी, दरमियां=बीच, कमर=मध्यदेश, बसर=जीवन-निर्वाह।

  2. Dr. Bishwa Mohan Acharya "Pyasa" said,

    on September 25th, 2016 at 6:52 pm

    कर लेंगे हम यूं बसर

    तन्हा हूं इक मैं भी इधर तन्हा है इक तू भी उधर
    तन्हाई में मिलकर दोनों तै कर लें इक नई सफ़र।

    शबे-तार में क़ैद हैं हम, शबे-महताब में होगी तुम
    न रोएंगे फिर कभी मिल भी जाएं शबे-वस्ल अग़र।

    चला था मैं तुझसे मिलने, चली थी तू मुझसे मिलने
    पता नहीं दोनो को यहां, दे दे क़ासिद कोई असर।

    हम हैं यूं ही अहले ज़मीं, तू तो होगी अहले अदम
    मिल कर बना लें हम भी, दरमियां इक नई कमर।

    महकें मेरे मकां शबो-रोज़, तेरे वजूद के चन्दन से
    बाग़ों में हों महक गुलों की, कर लेंगे हम यूं बसर।

    “प्यासा”

    शबे-तार=अंधेरी रात, शबे-महताब=चांदनी रात, शबे-वस्ल=मिलन की रात, क़ासिद=पत्रवाहक, असर=निशाना, अहले-ज़मीं=सांसारिक लोग, अहले अदम=यमलोक के निवासी, दरमियां=बीच, कमर=मध्यदेश, बसर=जीवन-निर्वाह।

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